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ज्येष्ठ की तिरस्कार से पुरस्कार की ओर प्रगति

सम्वत् 2075 में ज्येष्ठ मास अधिक मास है। जैसा की नाम से ही विदित है यह मास सामान्य 12 मास से अतिरिक्त है। इसको मलमास, पुरुषोत्तम मास नाम से भी जाना जाता है। परन्तु क्या प्रत्येक मलमास, अधिक मास है? मलमास कहते किसे हैं? मल नाम सुनते ही मानव मल की भावना आती है फिर […]

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शुक्राचार्य द्वारा दधीचि को महामृत्युञ्जय मंत्र का उपदेश

ये भजंति च तं प्रीत्या शक्तीशं शंकरं सदा।। तस्मै शक्तित्रयं शंभुः स ददाति सदाव्ययम्।। तस्यैव भजनाज्जीवो मृत्युं जयति निर्भयः।। तस्मान्मृत्युंजयन्नाम प्रसिद्धम्भुवनत्रये।। — शिवपुराण, रुद्रसंहिता, अध्याय 28 जो लोग सदा प्रेमपूर्वक शक्ति के स्वामी भगवान शंकर का भजन करते हैं, उन्हें भगवान शम्भु प्रभुशक्ति, उत्साहशक्ति और मन्त्रशक्ति — ये तीनों अक्षय शक्तियाँ प्रदान करते है। भगवान […]

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सार्थ श्रीशिवमानस पूजा

मानस पूजा साधक के मन को एकाग्र व शांत करती है। शिव मानस पूजा में जितना समय भगवान के स्मरण और ध्यान में बीतता है अर्थात् व्यक्ति अन्तर जगत में रहता है, उतने ही समय वह बाहरी जगत से प्राप्त तनाव व विकारों से दूर रहकर मानसिक स्थिरता प्राप्त करता है। मानस पूजा में साधक […]

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वैशाख मास की अंतिम तीन तिथियों का महत्व

यास्तिस्रस्तिथयः पुण्या अंतिमाः शुक्लपक्षके।। वैशाखमासि राजेंद्र पूर्णिमांताः शुभावहाः।। अन्त्याः पुष्करिणीसंज्ञाः सर्वपापक्षयावहाः।। माधवे मासि यः पूर्णं स्नानं कर्त्तुं न च क्षमः।। तिथिष्वेतासु स स्नायात्पूर्ण मेव फलं लभेत्।। सर्वे देवास्त्रयोदश्यां स्थित्वा जंतून्पुनंति हि।। पूर्णायाः पर्वतीर्थैश्च विष्णुना सह संस्थिताः।। चतुर्दश्यां सयज्ञाश्च देवा एतान्पुनंति हि।। स्कन्दपुराण के वैष्णव खण्ड के अनुसार वैशाख मास की अंतिम तीन तिथि (त्रयोदशी, चतुर्दशी, […]

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अक्षय तृतीया, परशुराम जयन्ती तथा बाँकेबिहारी वृन्दावन चरण दर्शन

इस वर्ष अक्षयतृतीया बुधवार और कृत्तिका नक्षत्र युक्त है। भगवान् श्रीकृष्ण ने भविष्यपुराण में बुधवार और रोहिणी नक्षत्र युक्त वैशाख शुक्ल तृतीया की अतिविशेष प्रशंसा की है। यह संयोग वर्षों बाद मिलता है। पहले हमें वर्ष 2008 में मिला था और अब वर्ष 2025 में मिलेगा। परन्तु मत्स्यपुराण में भगवान् शंकर ने कृत्तिका नक्षत्र युक्त […]

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मेष संक्रान्ति और जगत लग्न

पूर्वराशिं परित्यज्य उत्तरां याति भास्करः। स राशिः सङ्क्रमाख्या स्यान्मासत्र्वायनहायने।। पूर्व राशि का त्याग करके सूर्य जब दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो इसे संक्रांति कहते हैं। 14 अप्रैल 2018 को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर सूर्यनारायण मेष राशि में प्रवेश करेंगे। अतः मेष संक्रान्ति का पर्व मनाया जाएगा। इसको मेषार्क भी कहते हैं। […]

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वैशाख मास भगवान् विष्णु को समर्पित

वैशाख हिन्दू धर्म का द्वितीय महीना है। विशाखा नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने के कारण इसका नाम वैशाख पड़ा। इस वर्ष 1 अप्रैल (उत्तर भारत हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार) से वैशाख का आरम्भ हो रहा है। वैशाख मास पुण्यकारी, विष्णु भगवान् को अत्यंत प्रिय है। वैशाख मास का एक नाम माधव मास भी है। इस मास के […]

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नवरात्र का व्रत क्यों और कैसे रखें

देवीभागवत पुराण के तृतीय स्कन्ध 26वें अध्याय में शरत्काल तथा बसन्त ऋतू में नवरात्र व्रत क्यों करते हैं इसको समझाते हुए व्यास जी कहते हैं। शृणु राजन्प्रवक्ष्यामि नवरात्रव्रतं शुभम् । शरत्काले विशेषेण कर्तव्यं विधिपूर्वकम् ॥ ३ ॥ वसन्ते च प्रकर्तव्यं तथैव प्रेमपूर्वकम् । द्वावृतू यमदंष्ट्राख्यौ नूनं सर्वजनेषु वै ॥ ४ ॥ शरद्वसन्तनामानौ दुर्गमौ प्राणिनामिह । […]

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आने वाले समय को नवरात्र की पूजा द्वारा सुगम बनाएँ

चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से चैत्र नवरात्र का शुभारम्भ होता है। शक्ति की आराधना के लिए नवरात्र बहुत ही विशेष अवसर होता है। नवरात्र में की गयी पूजा से माँ जल्दी प्रसन्न होकर अपने भक्तों का उद्धार करती है। वसंत ऋतु होने के कारण इनको वासन्तीय नवरात्र भी कहते हैं। एक वर्ष में चार नवरात्र […]

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चैत्र मास मधु मास

होली के तुरंत बाद चैत्र मास का प्रारंभ हो जाता है। चैत्र हिन्दू धर्म का प्रथम महीना है। चित्रा नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने के कारण इसका नाम चैत्र पड़ा — चित्रानक्षत्रयुक्ता पौर्णमासी यत्र सः। इस वर्ष 2 मार्च 2018 (उत्तर भारत हिन्दू पञ्चाङ्ग के अनुसार) से चैत्र का आरम्भ हो रहा है। चैत्र मास को मधु […]