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Tuesday 14 July 2020

भाजपा के लिए लिटमस टेस्ट हैं ये उपचुनाव

इस सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस के समर्थन वाले पीपुल्स डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) और भाजपा के समर्थन वाले नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के बीच है

नई दिल्ली—तीन राज्यों की चार लोकसभा और नौ राज्यों की 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए सोमवार सुबह मतदान शुरू हो गया। जिन चार लोकसभा सीटों पर वोटिंग हो रही है उनमें महाराष्ट्र की पालघर व भंडारा-गोंदिया, उत्तरप्रदेश की कैराना और नगालैंड की नगालैंड सीटें शामिल हैं। वर्ष 2014 के आम चुनाव में नगालैंड को छोड़कर अन्य तीन सीटें भाजपा ने बड़े अंतर से जीती थीं। हालांकि इस बार इन तीन सीटों पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव की दृष्टि से यह चुनाव भाजपा के लिए लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। इसलिए सभी की निगाहें इन तीन सीटों पर लगी हुई हैं। सभी सीटों की मतगणना 31 मई को होगी और नतीजे भी उसी दिन दोपहर तक आने की उम्मीद है।

लोकसभा उपचुनाव पालघर सीट—भाजपा सांसद चिंतामण वनगा के निधन से रिक्त हुई। यहां से शिवसेना ने श्रीनिवास वनगा और भाजपा ने राजेंद्र गावित को प्रत्याशी बनाया है। श्रीनिवास भाजपा के दिवंगत सांसद चिंतामण वनगा के बेटे हैं। शिवसेना उन्हें अपने पाले में करने में कामयाब हो गई। वर्ष 2014 में इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार चिंतामण वनगा को 5,33,201 वोट मिले थे। उन्होंने बहुजन विकास अघाड़ी के बलीराम सुकुर जाधव को 2,39,520 वोटों से हराया था। कांग्रेस-एनसीपी ने 2014 में इस सीट से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था, लेकिन इस बार साझेदारी करके दामोदर शिंगदा को टिकट दिया है।

भंडारा-गोंदिया— भाजपा के बागी सांसद नाना पटोले के इस्तीफे से रिक्त हुई है। पटोले कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। यहां से एनसीपी ने मधुकर कुकड़े और भाजपा ने हेमंत पाटले को प्रत्याशी बनाया है। नाना पटोले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इस सीट पर कांग्रेस का एनसीपी से समझौता हुआ है। माना जा रहा था कि कांग्रेस पटोले को टिकट देती तो एनसीपी का एक धड़ा उनका समर्थन नहीं करता। वर्ष 2014 में यहां पटोले को 6,06,129 वोट मिले थे। उन्होंने एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल को डेढ़ लाख मतों से हराया था।

कैराना— भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन से रिक्त हुई है। यहां से भाजपा ने हुकुम सिंह की पुत्री मृगांका सिंह को और रालोद ने तबस्सुम हसन को प्रत्याशी बनााया है। इस उपचुनाव में विपक्षी दलों ने भाजपा उम्मीदवार की तगड़ी घेराबंदी की है। रालोद उम्मीदवार तबस्सुम को सपा, बसपा, कांग्रेस और आप ने समर्थन दिया है। वर्ष 2014 में हुकुम सिंह को 5,65,909 पत मिले थे। उन्होंने सपा की नाहिद हसन को 2,36,636 वोटों से हराया था।

नगालैंड—मौजूदा मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के इस्तीफ से यह सीट रिक्त हुई है। वे भाजपा के समर्थन वाले नगा पीपुल्स फ्रंट से हैं। यहां से पीडीए ने तोखेयो येपथोमी को प्रत्याशी बनाया है, जबकि एनपीएफ ने सीए अपोक जमीर को मैदान में उतारा है। इस सीट पर सिर्फ दो ही उम्मीदवार हैं। राज्य की यह इकलौती लोकसभा सीट है। इस सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस के समर्थन वाले पीपुल्स डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) और भाजपा के समर्थन वाले नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के बीच है। तीन बार से इस सीट पर एनपीएफ को जीत मिली। इससे पहले इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा था।

विधानसभा उपचुनाव— नौ राज्यों की जिन दस सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, उनमें भाजपा, झामुमो और कांग्रेस का 2-2 सीटों पर कब्जा था, जबकि जदयू, अकाली दल, सीपीएम व टीमएसी के खाते में एक-एक सीटें थीं। नूरपुर (उत्तर प्रदेश): भाजपा के खाते में थी। विधायक लोकेन्द्र सिंह के निधन से खाली हुई। जोकीहाट (बिहार): यह सीट जदयू के पास थी। विधायक सरफराज आलम के राजद में जाने से खाली हुई। गोमिया और सिल्ली (झारखंड): दोनों सीटें झामुमो के पास थीं। विधायकों को अयोग्य घोषित करने की वजह से रिक्त। चेंगन्नूर (केरल): सीपीएम के पास थी। विधायक केके रामचंद्रन नायर के निधन से खाली हुई। पलूस कडेगांव (महाराष्ट्र): कांग्रेस के पास थी। विधायक पतंगराव कदम के निधन से खाली हुई। अंपाती (मेघालय): कांग्रेस के पास थी। पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा के इस्तीफे से खाली हुई। शाहकोट (पंजाब): अकाली दल के पास थी। विधायक अजीत सिंह कोहड़ के निधन से रिक्त। थराली (उत्तराखंड): भाजपा के पास थी। विधायक मगनलाल शाह के निधन से रिक्त। महेश्ताला (प.बंगाल): टीएमसी के पास थी। विधायक कस्तूरी दास के निधन के कारण रिक्त। हिन्दुस्थान समाचार

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