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शनि जयंती कल, कुछ राशियों के लिए शुभ रहेगा समय

15 मई को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या है, शनि जयंती को भगवान शनि के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि शनि अमावस्या के दिन शनि भगवान से जुड़े उपाय करने से जीवन में खुशियां आती हैं। इस दिन का स्वयंसिद्ध मुहूर्त है। कहा जाता है शनि जयंती ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाती है। शनिदेव को न्याय के देवता कहा जाता है। कहते हैं शनि भगवान कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं। शनि देव अपने भोग काल में उन्हीं को नुकसान पहुंचाते हैं जिनके कर्म बुरे होते हैं। जिन जातकों के कर्म अच्छे होते हैं शनि भगवान उनके साथ अच्छा ही अच्छा करते हैं।

आज हम आपको बता रहे हैं शनि जयंती के दिन किए जाने वाले उपाय।

मेष: शनि नवम है। इच्छाओं को दबाकर रखें। निवेश से बचें और कोई विवाद, जोखिम न लें।

वृषभ: वर्तमान समय में शनि की ढैया बनी रहेगा। शनि वक्री है। इस समय में परेशानियां कम रहेंगी और आय भी अच्छी बनी रहेगी।

मिथुन: शनि की दृष्टि राशि पर हुए लेकिन वक्री होने के कारण आपके ऊपर शनि का बुरा असर नहीं रहेगा। समय सामान्य रहेगा।

कर्क: राशि के ऊपर शनि का कोई बुरा प्रभाव नहीं है। सब कुछ सामान्य रहेगा। आर्थिक ढांचा सुधरेगा और नई योजनाएं सफल होगी।

सिंह: शनि के वक्री होने से काम में देरी के साथ व्यापारियों को अस्थिर आय की प्राप्ति होगी। सरकारी कामों में अनावश्यक देरी हो सकती है।

कन्या: शनि का ढैया चल रहा है। इस कारण समय का लाभ उठाएं। सभी आवश्यक काम अभी निपटाने का प्रयास करें, लेकिन जोखिम से दूर रहें।

तुला: शांति बनाएं रखें, धैर्य से काम लें और विवादों से दूर रहें। इस समय निवेश से बचें और नए काम शुरू न करें।

वृश्चिक: इस राशि के लिए शनि की स्थिति ठीक नहीं है। इस कारण ये लोग काफी समय से परेशान हैं। सावधान रहने की आवश्यकता है।

धनु: शनि का गोचर साढ़ेसाती जारी रहेगी। सहयोग प्राप्त होगा और आय भी अच्छी बनी रहेगी। नए कार्यों की प्राप्ति होगी।

मकर: शनि की साढ़ेसाती शुरु हो गई हुए शनि राशि स्वामी होने से यह प्रतिकूल नहीं होगा। समझदारी से मुश्किलों का हल निकलेगा।

कुंभ: वर्तमान में शनि की दृष्टि प्राप्त हो रही है। समय भी सभी प्रकार से अनुकूल है। व्यापार और नौकरी में तरक्की होगी।

मीन: शनि का प्रभाव राशि पर अनुकूल है। राशि प्रबल है। कार्य में सफलता मिलेगी और आय की कमी नहीं रहेगी। कारोबार उत्तम रहेगा।

1988 में 15 मई को ही जयंती थी

शनि जयंती और मंगलवार का योग रहेगा। मंगलवार का कारक मंगल है। मंगल ग्रह इस समय अपनी उच्च राशि मकर में है। ज्योतिषियों के अनुसार मंगल के उच्च राशि में रहते हुए शनि जयंती 205 साल पहले 30 मई 1813 में आई थी। उस समय भी मंगल, केतु के साथ मकर राशि में और राहु कर्क राशि में था, बुध मेष में था। इसवर्ष शनि धनु राशि में वक्री है। 29 साल पहले भी शनि धनु राशि में था और उस समय शनि जयंती मनाई गई थी। 1988 में 15 मई को ही शनि जयंती थी। ये भी एक शुभ योग है।

Aacharya Kumar Alok

By Aacharya Kumar Alok

Scholar of astrology based in Patna with a consultancy branch in Delhi