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वित्तमंत्री को एक सीए का खुला पत्र

माननीय अरुण जेटली जी,

प्रणाम!

क़ायदे से मुझे आपको यह पत्र 30 सितम्बर से पहले लिखना चाहिए था और मैं एक दिन लेट हूँ। उम्मीद करता हूँ कि अगर आपका इनकम टैक्स विभाग इनकम टैक्स रिटर्न फ़ॉर्म जारी करने में 3 महीने की देरी कर सकता है तो मेरा एक दिन देरी करने का अपराध क्षमायोग्य होगा।

मेरा यह अपराध इसलिए भी क्षमायोग्य हो जाता है क्योंकि मैं 30 सितम्बर तक साधारण करदाता का पैसा आपके विभाग की जेब में डालने में व्यस्त था ताकि आम करदाता के ख़िलाफ़ मुश्किलें खड़ी करने के काम में आपका विभाग पैसे की क़िल्लत महसूस न करे।

ख़ैर, अब उस मुआमले पर आते हैं जिसके लिए यह पत्र लिखा गया है। जैसा कि आपकी जानकारी में है, इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए इनकम टैक्स विभाग हर साल इनकम टैक्स रिटर्न्स के फ़ॉर्म जारी करता है और उन फ़ॉर्म्स में ही आम करदाता अपनी आय का विवरण विभाग में जमा करवा सकते हैं और टैक्स दे सकते हैं। इन फ़ॉर्म्स के आने का समय हर साल 1 अप्रैल  होता है, लेकिन इन फ़ॉर्म्स को कम से कम जून में जारी करके इनकम टैक्स विभाग सरकारी कामों में देरी करने की अक्षुण्ण परम्परा का निर्वहन करता है।

इस बार तो हद ही हो गई जब आयकर रिटर्न फ़ॉर्म्स जुलाई तक आ पाए। ख़ैर! अच्छा तब लगा जब अपनी इस ग़लती को मानते हुए इनकम टैक्स विभाग ने छोटे करदाता के लिए रिटर्न भरने की तारीख़ पहले एक महीना, उसके बाद 7 दिन और बढ़ा दी। इस तरह छोटे करदाता के लिए रिटर्न भरने की तारिख 7 सितम्बर तक आ गई।

लेकिन इसके बाद शायद आयकर विभाग को अहसास हुआ कि उसका काम करदाता की मुश्किलें आसान करना नहीं बल्कि उन्हें बढ़ाना है और वे अपने काम पर लग गए!

जैसा कि आपकी जानकारी में है कि रु० 1 करोड़ से अधिक टर्नओवर (सेल) के हर व्यवसायी को अपने व्यवसाय का ऑडिट करना ज़रूरी है और इसके बाद सीए को उनकी ऑडिट रिपोर्ट एवम् अन्य फॉर्म ऑनलाइन जमा करने होते हैं। 7 सितम्बर के बाद 23 दिन के सीमित समय में इस महती काम को करने की ज़िम्मेदारी यक़ीनन कुछ फ़ॉर्म्स जारी करने के काम से कम से कम 100 गुना बड़ी है। लेकिन आपका विभाग लगातार इसी बात पर अड़ा रहा कि यह काम किया जा सकता है। मैं आपकी इस बात से सहमत हूँ कि यह काम बहुत आसान है और इसे करना सम्भव भी है, बशर्ते आपका विभाग फॉर्म जारी करने में 4 महीने लेट न हो और आपका सर्वर सही काम करता रहे। दुर्भाग्य से ये दोनों चीज़ें नदारद दिखाई देती हैं। ऐसे में तारीख़ न बढ़ाने पर अड़ा रहकर आपका विभाग  औरों को नसीहत, आप मियां फ़ज़ीहत”  की ज़िंदा  मिसाल बनता दिख रहा है।

पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ हाईकोर्ट से निर्देश प्राप्त करने के बावजूद आपका विभाग तमाम बेशर्मी के लबादे बदन पर डाले हुए सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया। सुप्रीम कोर्ट से भी कोई राहत न मिलती देख 30 सितम्बर की शाम को बेशर्मी का नया रिकॉर्ड बनाते हुए आपके विभाग ने उन सभी राज्यों  के लिए ऑडिट और रिटर्न जमा करने की तारीख़  बढ़ा दी जहाँ-जहाँ आप केस हार गए थे।

तो आप सन्देश क्या देना चाहते हैं? क्या सी०ए० अपना ऑडिट का काम छोड़कर आपकी सरकार के ख़िलाफ़ केस लड़ते रहें? और जहाँ आप केस हार जायेंगे वहाँ आप तारीख़ बढ़ा देंगे?

श्रीमान, मेरी आपसे नम्र विनती है कि इस तरह के कामों में विभाग की ऊर्जा बर्बाद न करके उनसे ज़रा काम लीजिये और आयकर फॉर्म्स हर साल 1 अप्रैल तक जारी करवा दीजिये। साथ ही अपने सर्वर का काम अच्छे प्रोफेशनल्स से करवाएं ताकि रिटर्न जमा करने में हमें कोई समस्या न हो। यक़ीन  मानिए अगर आप इतना काम कर पाए तो हमें आपके डेट बढ़ाने की ख़ैरात की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

इसके अलावा आपकी सरकार, जिसका मैं अभी भी बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ, का प्रमुख नारा “व्यवसाय करने की आसानी” है — उसे ध्यान में रखें। एक तरफ़ आप व्यापारियों को भारत में बुलाने की बातें करते हैं, दूसरी तरफ़ आपका विभाग इस प्रकार की हरकतें करता है जैसे भारत में व्यवसाय करना कोई जुर्म हो।

बात केवल आयकर विभाग की नहीं है, सेल्स टैक्स से लेकर एक्साइज़ तक सब इसी लाइन पर चल रहे हैं। अब कृपया राज्य सरकारों का हवाला देकर बचने की कोशिश न करें। राज्य सरकारों से सम्वाद करें और व्यापार को आसान बनाएँ। तभी आपका “अच्छे दिन” का वादा पूरा होगा।

और हाँ, आम करदाता आपको टैक्स देश की बेहतरी के लिए देता है, न कि आपके विभाग की काहिली का बचाव करने के लिए केस लड़ने में फ़ीस चुकाने के लिए।

बेहतर भारत की उम्मीद में लगा एक सामान्य व्यक्ति (और दुर्भाग्य से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट)…

सतीश शर्मा

[प्रासंगिक — Deadline for e-filing of I-T returns extended again]

Satish Sharma

By Satish Sharma

Chartered accountant, independent columnist in newspapers, former editor of Awaz Aapki, activist in Anna Andolan, based in Roorkee

2 replies on “वित्तमंत्री को एक सीए का खुला पत्र”

Very True Satish ji. You have concluded the tax extension episode. I started it on 5th september by writing a letter to him. At that time no one was interested to file a case. Their adamancy forced the fraternity to file and file cases and then receive favorable orders in serials. The worst was about to land and it landed with their sectorial extension. Then an open apology posted by revenue secretary and PMO took cognigence of the same on social media. I hope we will get the forms from day one. Satish ji, Keep it up. CA Amresh Vashisht

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