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सफ़ाई को मिला क्रिकेट का साथ

गांधी के यौम-ए-पैदाइश को वज़ीर-ए-आज़म ने स्वच्छता दीवस के तौर पर मनाने का फ़ैसला कर अवाम को सफ़ाई की तरफ़ मुतवज्जा किया। पहले गांधी जयंती का मतलब था छुट्टी यानी देर तक सोना, तफ़रीह व मस्ती करन वग़ैरा। नरेंद्र मोदी के इस क़दम की उनके मुख़ालिफ़ भी तारीफ़ किए बग़ैर न रह सके। उन्होंने इस मुहिम का आग़ाज़ दिल्ली से ख़ुद सफ़ाई करके किया। इसी दिल्ली से जो मुल्क की राजधानी होने के साथ आलूदगी में भी सर-ए-फ़हरिस्त है। वज़ीर-ए-आज़म की काल पर समाजी कारकुनों, रज़ाकार तन्ज़ीमों, क्रिकेट खिलाड़ियों, फ़िल्मी अदाकारों, सयासी हस्तीयों यहां तक कि कॉर्पोरेट्स ने भी इस मुहिम में हिस्सा लिया।

सफ़ाई के लिए मिज़ाज और माहौल की ज़रूरत होती है। यूनीसेफ ने आई सी सी, बी सी सी आई के इश्तिराक से टी ट्वेन्टी वर्ल्ड कप के मेज़बान शहरों में टीम स्वच्छ क्लीनिकों को लॉन्च किया। इस प्रोग्राम की इब्तिदा-ए-यूनीसेफ के ख़ैर सगाली सफ़ीर और क्रिकेट सम्राट सचिन तेंदूलकर के हाथों दिल्ली में ही हुई थी। इस मौक़े पर आई सी सी के चीफ़ ऐगज़ीक्यूटिव डेविड रिचर्डसन, बी सी सी आई के एज़ाज़ी सैक्रेटरी अनुराग ठाकुर और यूनीसेफ जुनूबी एशिया की डायरेक्टर क्रेन होलशोफ़ मौजूद थे। एक सवाल के जवाब में यूनीसेफ इंडिया की चीफ़ कम्यूनीकेशन कर विलयन डीन डलक ने इस का मक़सद अवाम को सफ़ाई की तरफ़ मुतवज्जा करन बताया। उन्होंने कहा कि टीम स्वच्छ पहल खेल के ज़रीए हाइजीन, सैनीटेशन (साफ़ सफ़ाई) को बढ़ावा देने की मुनफ़रद कोशिश है। इस के ज़रीए खेल के जुनून का फ़ायदा उठाते हुए खुले में रफ़ा हाजत को रोकने, बैत उल-ख़ला के इस्तेमाल क़िवाम करने, खाने से पहले और रफ़ा हाजत के बाद साबुन से हाथ धोने को बढ़ावा देन है ताकि बच्चों की ज़िंदगी को बचाया जा सके। दुनिया की 32% आबादी यानी 2.4 बिलीयन लोगों के पास सैनीटेशन की सहूलत मौजूद नहीं है। उनमें से भारत के 60 करोड़ लोग अब भी खुले में रफ़ा हाजत करते हैं। पाँच बरस से कम उम्र के ज़्यादा-तर बच्चों की मौत निमोनिया या डायरिया की वजह से होती है। खुले में रफ़ा हाजत डायरिया का बड़ा सबब है।

टीम स्वच्छ क्लीनिक लॉन्च प्रोग्राम में 3 शहरों को देखने, स्कूली बच्चों सेबात करने और रज़ाकार तन्ज़ीमों के ज़िम्मेदारों से मिलने का मौक़ा मिला। इस दौरान जो तजुर्बात हुए वो यहां शेयर करन ज़रूरी महसूस होता है। पहला शहर है भारत का दिल दिल्ली। यहां फ़िरोज़ शाह कोटला क्रिकेट स्टेडीयम में हरदिल अज़ीज़ खिलाड़ी युवराज सिंह और पवन नेगी ने स्कूली बच्चों के साथ क्रिकेट खेली। उन्हें साफ़ सफ़ाई के बारे में बताते हुए कहा कि जिस तरह बल्ले से मारकर गेंद को दूर करते हैं, इसी तरह सफ़ाई के ज़रीए अपनी ज़िंदगी से बीमारी के जरासीम को दूर भगान है। यहां बच्चों को हाथ धोने के तरीक़े से भी वाक़िफ़ कराया गया। इस प्रोग्राम में जी बी पंत सर्वोदय विद्यालय गोविन्दपूरी और कमला नेहरू सर्वोदय विद्यालय निज़ामुद्दीन के बच्चे और बच्चीयों ने शिरकत की थी। जी बी पंत स्कूल के मोहित ने बताया कि उनके स्कूल में बैत-उल-ख़ला कम हैं और जो हैं उनकी पूरी तरह साफ़ सफ़ाई नहीं होती जिसकी वजह से बच्चे उन्हें इस्तेमाल नहीं करते। मोहित के मुताबिक़ स्कूल के बैत उल-ख़ला में पानी का इंतज़ाम भी नहीं है। वहीं कमला नेहरू स्कूल की तालिबात रोशनी, तानीया, मर्यम, तरन्नुम और महजबीं ने स्कूल में पीने के पानी के न होने की शिकायत की।उन्होंने बताया कि स्कूल में जो पानी आता है वो पीने के लायक़ नहीं होता। उनका कहन था कि हम स्कूल के बाथरूम को बहुत मजबूरी में इस्तेमाल करते हैं क्यों कि वो बहुत गंदे रहते हैं। उनकी रोज़ान सफ़ाई नहीं होती। हमें डर लगता है कि गंदगी की वजह से बीमार न हो जाएं। लड़कियों के बीच में पढ़ाई छोड़ने की एक वजह स्कूल में बैत-उल-खला न होन या बाथरूम का साफ़ सुथरा न होने को भी मान जाता है।

अक्सर लड़कियों ने कहा कि वो खेलों में दिलचस्पी रखती हैं लेकिन उनके स्कूल में खेल का माक़ूल इंतज़ाम नहीं है। ये पूछे जाने पर कि वो पढ़ कर क्या बनन चाहती हैं तो मर्यम वकील, रोशनी डाक्टर, तानीया ने टीचर बन कर बच्चों को पढ़ाने की ख़ाहिश ज़ाहिर की जबकि महजबीं ने कहा कि अभी उसने इस बारे में कुछ सोचा नहीं है। यूनीसेफ कम्यूनीकेशन स्पैशलिस्ट सोनीया सरकार ने टीम स्वच्छ क्लीनिकों की लॉन्च को सफ़ाई मुहिम का पहला मरहला बताया।उन्होंने कहा कि टी ट्वेन्टी खेलों के बाद बैत-उल-ख़ला के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वसफ़ाई के फ़रोग़ में समाज के हर तबक़ा की मदद की जाएगी। ख़ास तौर पर स्कूली बच्चों, उनके वालदैन,असातिज़ा,स्कूल इंतिज़ामीया, मुहल्ला कमेटीयों, रज़ाकार तन्ज़ीमों और समाज के ज़िम्मेदार लोगों क़व्वास मुहिम का हिस्सा बनाया जाएगा। हाइजीन वसीनी टेशन के लिए उनकी हिम्मत अफ़्ज़ाई भी की जाएगी। इस कंपेन को कामयाब बनाने के लिए मीडीया की भागीदारी को यक़ीनी बनाया जायेगा।

टूर वाश क्लीनिक और टीम स्वच्छ का कलकत्ता के ईडन गार्डन में शानदार इस्तिक़बाल हुआ। यहां भारतीय क्रिकेट टीम के मनोज तीवारी और वूमैन क्रिकेट टीम की खिलाड़ी शुभ लक्ष्मी शर्मा ने क्रिकेट शायक़ीन से बातें कीं। उन्होंने बच्चों के साथ क्रिकेट खेली और अपने क्रिकेट के तजुर्बात को साझा किया। खिलाड़ियों ने स्कूली बच्चों को पानी, सैनीटेशन और हाइजीन की एहमीयत के बारे में बताया। यहां नारायण तुलाराम कृष्ण मंदिर विद्यालय सुंदरबन और बिनोदनी गर्ल्स हाई स्कूल के तलबा तालिबात ने हाथ धोने के पाँच असटीप करके दिखाए। बच्चों ने खिलाड़ियों व सहाफ़ीयों से खुल कर बातें कीं। नारायण तिला स्कूल के मह्दी हुसैन ने बताया कि उनके स्कूल में पंद्रह टवाइलीट हैं। स्कूल की जानिब से उनकी साफ़ सफ़ाई पर बहुत ध्यान दिया जाता है। उनके स्कूल में बिजली के लिए सोलर सिस्टम लगा हुआ है। सुंदरबन इलाक़े में पानी की आम परेशानी है लेकिन स्कूल में पीने के पानी का माक़ूल इंतज़ाम है। मह्दी बड़े हो कर टीचर बन कर बच्चों को पढ़ान चाहता है जबकि इस स्कूल का मोनीश अनजीनर, नूर आलम खिलाड़ी और सौ बंदो हलदर वकील। बच्चों ने बताया कि उनके स्कूल में बैडमिंटन, क्रिकेट, फूटबाल, बाली वाल, कराटे वग़ैरा खेलों का इंतज़ाम है। बिनोदनी गर्ल्स स्कूल की लड़कियों से बात करके मालूम हुआ कि उनके स्कूल में सुबह की असैंबली में साफ़ सफ़ाई के बारे में बताया जाता है। कभी कभी इस में WHO और यूनीसेफ कीजानिब से भी कोई न कोई आता रहता है। इन्द्राणी सरकार दसवीं की तालिबा ने बताया कि खेलों के साथ स्कूल में हमें बाग़बानी भी सिखाई जाती है ताकि पेड़ लगाकर माहौल को साफ़ रखा जा सके। सोनीया रजक, सोमी भट्टाचार्य, सुरांश दत्त बिस्वास, सरिया नष तीवारी ने सोशल वर्क, क़ानून, इंजीनीयरिंग और एम बी ए की पढ़ाई करने की ख़ाहिश ज़ाहिर की।

यूनीसेफ मग़रिबी बंगाल चीफ़ असअद अल रहमान ने सहाफ़ीयों से बात करते हुए बताया किसफ़ाई की इस मुहिम में बंगाल के 82,000 स्कूलों को शामिल किया गया है। इस के तहत साफ़ सफ़ाई वाले शहरों की इज़्ज़त-अफ़ज़ाई करने का भी मन्सूबा है। उन्होंने कहा कि हाथ धोने की आदत और खुले में रफ़ा हाजत न करने से डायरिया को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि78फ़ीसद घरों में बैत उल-ख़ला हैं लेकिन उन्हों इस्तेमाल नहीं किया जाता और न ही साफ़ सफ़ाई का ख़्याल रखा जाता है।अब सरकार ने एक डिपार्टमैंट बनाया है जवासकोमोनीटर करेगा।उन्होंने कहा कि भारत शुमाली एशिया का एक वाहिद ऐसा मुलक है जहां बिन बेहतर सैनीटेशन की सहूलत वाले लोगों की तादाद में इज़ाफ़ा हुआहै। ये आंकड़ा 1990 में 723 मिलियन था जो 2015 मैं बढ़कर 774 मिलियन हो गया है। मुंबई के वानखेड़े स्टेडीयम में टीम स्वच्छ क्लीनिक लॉन्च के पहले मरहले की आख़िरीतक़रीब हुई।इस में स्कूली बच्चों ने हाथ धोने के असटीप पर मुश्तमिल ये नज़म पढ़ कर सुनाई—

सबसे पहले होताहै हाथ गीला
फिर हाथ पे नाचे साबुन रंगीला
हाथ से होता फिर हाथ का साथ
फिर घूम के आगे पीछे खेलें हाथ
खेलो तब उंगलीयों में घुस कर
फिर चुलाव नाख़ूनों का चक्कर
हाथ करे फिर पानी में छमछम
क्यों कि साफ़ हाथ में, ही है दम

यहां तीन रज़ाकार तंज़ीमें बच्चों को साथ ले कराई थीं। ये तनज़ीमें संगठन, प्रथम और सी सी डी टी साथ मिलकर यूनीसेफ की मदद से बच्चों के हक़ और उनकी हिफ़ाज़त के लिए मुंबई में काम कर रही हैं। उन्होंने स्कूली बच्चों के साथ वालदैन को भी इस काम में अपने साथ शामिल किया है। सी सी डी टी के प्रवीण कुमार ने बताया कि मुंबई को चार हिस्सों में तक़सीम किया गया है, एक हिस्से की ज़िम्मेदारी एक तंज़ीम ने ले ली है। रेलवे स्टेशन या रेलवे लाईन के आस-पास के बच्चों की हिफ़ाज़त का काम चाइल्ड लाईन वाले करते हैं हमें भी कोई बच्चा अगर इस इलाक़ा में मिलता है तो हम उनके हवाले कर देते हैं। प्रवीण के मुताबिक़ ये तंज़ीमें बच्चों की हर लिहाज़ से हिफ़ाज़त का ख़्याल रखती हैं मसलन उनकी बीमारीयों से हिफ़ाज़त, गंदगी से बचाना, हियूमन ट्रैफीकिंग से महफ़ूज़ रखना। साफ़ पानी की फ़राहमी, खेल को द का इंतज़ाम, कम्पयूटर ट्रेनिंग वग़ैरा। उन्होंने बच्चों के लिए सैंटर बनाए हुए हैं जहां वो बच्चों वो उद्दीन की मीटिंग लेते हैं। यहां हमने कई बच्चों से बात की उनमें से सेंट फ्रांसिस स्कूल में आठवीं के तालिब-ए-इल्म यश ने बताया कि शेवा जी नगर बोरी वाली वैस्ट में रहता हूँ। हमारे इलाक़े के टवाइलीट में पानी नहीं आता था। उनमें लाईट, दरवाज़े नहीं थे।सफ़ाई का भी माक़ूल इंतज़ाम नहीं था। डी डी भया (एन जी ओ वाले) ने इस के लिए हमारे यहां रैली निकाली तो मैं उनके पास गया।उन्होंने बताया कि सफ़ाई के क्या फ़ायदे हैं। बाहर से जो लोग आते हैं वो हमारे मलिक की गंदगी देखकर वापिस चले जाते हैं इस से हमारा नाम बदनाम होता है। जब तक हम नहीं बदलेंगे देश नहीं बदलेगा।

निशांत, संध्या जो सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं ने बताया कि हमारे यहां टोइलीट ख़राब हो चुके थे उनमें सफ़ाई भी नहीं होती थी। हमने बी एमसी को इस के लिए चिट्ठी लिखी। अश्वनी जो तिलक नगर मंसी पाल्टी के स्कूल में पढ़ता है ने बताया कि मैं गोवंडी में रहता हूँ। जहां बी एमसी ने हमारे इलाक़े को कूड़ा घर बनादिया है। इस से बहुत से लोग बीमार पड़ रहे हैं। मैं स्कूल में टीचर से जब टवाइलीट साफ़ न होने की शिकायत करता तो वो हमें डाँट कर भगा देती थीं। हमारे रिहायशी इलाक़े गोवंडी में पड़े कूड़े के ढेरों में दो हफ़्ता तक आग लगती रही जिसके धोवें और धूल से बहुत से लोग बीमार पड़ गए। हम बच्चों ने डी डी भयाके साथ मिलकर रैली निकाली, हम इस लड़ाई को आगे भी जारी रखेंगे।

इन चीदा चीदा तजुर्बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि मुल़्क सफ़ाई के मुआमले में कहाँ खड़ा है। इस मुहिम को खेल का साथ मिला है जिससे उम्मीद जागी है कि अवाम में सैनीटेशन, हाइजीन और वाश को लेकर बेदारी आएगी। इस्लाम में तहारत को नसफ़ ईमान बताया गया है क्यों कि सफ़ाई अच्छी सेहत की ज़मानत है और सेहत मंद इन्सान ही अच्छे ख़्यालात को जन्म देता है।

प्रेरणा इन्हीं से मिली
प्रेरणा इन्हीं से मिली

صفائی کو ملا کرکٹ کا ساتھ

گاندھی کے یوم پیدائش کو وزیراعظم نے سوچھتا دیوس کے طورپر منانے کا فیصلہ کرعوام کو صفائی کی طرف متوجہ کیا۔ پہلے گاندھی جینتی کا مطلب تھا چھٹی یعنی دیرتک سونا، تفریح ومستی کرنا وغیرہ۔ نریندرمودی کے اس قدم کی ان کے مخالف بھی تعریف کئے بغیر نہ رہ سکے۔ انہوں نے اس مہم کا آغاز دہلی سے خود صفائی کرکے کیا۔ اسی دہلی سے جو ملک کی راجدھانی ہونے کے ساتھ آلودگی میں بھی سرفہرست ہے۔ وزیراعظم کی کال پر سماجی کارکنوں، رضاکار تنظیموں، کرکٹ کھلاڑیوں،فلمی اداکاروں، سیاسی ہستیوں یہاں تک کہ کارپوریٹس نے بھی اس مہم میں حصہ لیا۔


صفائی کیلئے مزاج اورماحول کی ضرورت ہوتی ہے۔ یونیسیف نے آئی سی سی، بی سی سی آئی کے اشتراک سے ٹی ٹوئنٹی ورلڈ کپ کے میزبان شہروں میں ٹیم سوچھ کلینکوں کو لانچ کیا۔ اس پروگرام کی ابتداء یونیسیف کے خیر سگالی سفیر اور کرکٹ سمراٹ سچن تندولکرکے ہاتھوں دہلی میں ہی ہوئی تھی۔ اس موقع پر آئی سی سی کے چیف ایگزیکٹیوڈیوڈ رچرڈسن، بی سی سی آئی کے اعزازی سکریٹری انوراگ ٹھاکر اور یونیسیف جنوبی ایشیا کی ڈائریکٹر کرین ہولشوف موجود تھے۔ ایک سوال کے جواب میں یونیسیف انڈیا کی چیف کمیونی کیشن کرولین ڈین ڈلک نے اس کا مقصد عوام کوصفائی کی طرف متوجہ کرنا بتایا۔ انہوں نے کہا کہ ٹیم سوچھ پہل کھیل کے ذریعہ ہائجین،سینی ٹیشن(صاف صفائی) کو بڑھاوا دینے کی منفردکوشش ہے۔ اس کے ذریعہ کھیل کے جنون کا فائدہ اٹھاتے ہوئے کھلے میں رفع حاجت کوروکنے، بیت الخلاکے استعمال کوعام کرنے، کھانے سے پہلے اور رفع حاجت کے بعد صابن سے ہاتھ دھونے کو بڑھاوا دینا ہے تاکہ بچوں کی زندگی کو بچایا جاسکے۔دنیاکی32فیصدآبادی یعنی2.4بلین لوگوں کے پاس سینی ٹیشن کی سہولت موجودنہیں ہے۔ ان میں سے بھارت کے60کروڑ لوگ اب بھی کھلے میں رفع حاجت کرتے ہیں۔ پانچ برس سے کم عمرکے زیادہ تر بچوں کی موت نمونیا یا ڈائریا کی وجہ سے ہوتی ہے۔ کھلے میں رفع حاجت ڈائریا کا بڑا سبب ہے۔


ٹیم سوچھ کلینک لانچ پروگرام میں تین شہروں کو دیکھنے، اسکولی بچوں سے بات کرنے اور رضاکارتنظیموں کے ذمہ داروں سے ملنے کاموقع ملا۔ اس دوران جوتجربات ہوئے وہ یہاں شیئرکرنا ضروری محسو س ہوتا ہے۔پہلاشہر ہے بھارت کا دل دہلی۔ یہاں فیروز شاہ کوٹلہ کرکٹ اسٹیڈیم میں ہردل عزیزکھلاڑی یوراج سنگھ اور پون نیگی نے اسکولی بچوں کے ساتھ کرکٹ کھیلی۔ انہیں صاف صفائی کے بارے میں بتاتے ہوئے کہا کہ جس طرح بلے سے مارکر گیندکو دور کرتے ہیں، اسی طرح صفائی کے ذریعہ اپنی زندگی سے بیماری کے جراثیم کو دور بھگانا ہے۔ یہاں بچوں کو ہاتھ دھونے کے طریقہ سے بھی واقف کرایاگیا۔ اس پروگرام میں جی بی پنت سرودیہ ودیالیہ گوندپوری اور کملا نہرو سرودیہ ودیالیہ نظام الدین کے بچے اور بچیوں نے شرکت کی تھی۔ جی بی پنت اسکول کے موہت نے بتایاکہ انکے اسکول میں بیت الخلا کم ہیں اور جو ہیں ان کی پوری طرح صاف صفائی نہیں ہوتی جس کی وجہ سے بچے انہیں استعمال نہیں کرتے۔ موہت کے مطابق اسکول کے بیت الخلامیں پانی کا انتظام بھی نہیں ہے۔وہیں کملا نہرو اسکول کی طالبات روشنی، تانیہ، مریم، ترنم اور مہ جبیں نے اسکول میں پینے کے پانی کے نہ ہونے کی شکایت کی۔انہوں نے بتایاکہ اسکول میں جو پانی آتا ہے وہ پینے کے لائق نہیں ہوتا۔ ان کا کہنا تھا کہ ہم اسکول کے باتھ روم کوبہت مجبوری میں استعمال کرتے ہیں کیوں کہ وہ بہت گندے رہتے ہیں۔ ان کی روزانہ صفائی نہیں ہوتی۔ ہمیں ڈر لگتا ہے کہ گندگی کی وجہ سے بیمار نہ ہوجائیں۔ لڑکیوں کے بیچ میں پڑھائی چھوڑنے کی ایک وجہ اسکول میں بیت الخلا نہ ہونا یاباتھ روم کاصاف ستھرانہ ہونے کوبھی ماناجاتاہے۔


اکثرلڑکیوں نے کہاکہ وہ کھیلوں میں دلچسپی رکھتی ہیں لیکن ان کے اسکول میں کھیل کا معقول انتظام نہیں ہے۔ یہ پوچھے جانے پرکہ وہ پڑھ کرکیا بننا چاہتی ہیں تو مریم وکیل، روشنی ڈاکٹر، تانیہ نے ٹیچربن کر بچوں کو پڑھانے کی خواہش ظاہر کی جبکہ مہ جبیں نے کہاکہ ابھی اس نے اس بارے میں کچھ سوچا نہیں ہے۔یونیسیف کمیونی کیشن اسپیشلسٹ سونیا سرکار نے ٹیم سوچھ کلینکوں کی لانچ کو صفائی مہم کا پہلا مرحلہ بتایا۔انہوں نے کہاکہ ٹی ٹوئنٹی کھیلوں کے بعد بیت الخلا کے استعمال کوبڑھاوا دینے وصفائی کے فروغ میں سماج کے ہرطبقہ کی مددکی جائے گی۔ خاص طورپر اسکولی بچوں، ان کے والدین،اساتذہ،اسکول انتظامیہ، محلہ کمیٹیوں، رضاکار تنظیموں اور سماج کے ذمہ دار لوگوں کواس مہم کا حصہ بنایا جائے گا۔ ہائجین وسینی ٹیشن کیلئے ان کی ہمت افزائی بھی کی جائے گی۔ اس کمپین کو کامیاب بنانے کیلئے میڈیا کی بھاگیداری کو یقینی بنایاجائے گا۔


ٹور واش کلینک اور ٹیم سوچھ کا کلکتہ کے ایڈن گارڈن میں شاندار استقبال ہوا۔ یہاں بھارتیہ کرکٹ ٹیم کے منوج تیواری اور وومین کرکٹ ٹیم کی کھلاڑی شبھ لکشمی شرما نے کرکٹ شائقین سے باتیں کیں۔ انہوں نے بچوں کے ساتھ کرکٹ کھیلی اور اپنے کرکٹ کے تجربات کو ساجھا کیا۔ کھلاڑیوں نے اسکولی بچوں کو پانی،سینی ٹیشن اورہائجین کی اہمیت کے بارے میں بتایا۔ یہاں نارائن تلارام کرشن مندرودیالیہ سندربن اور بنودنی گرلس ہائی اسکول کے طلبہ وطالبات نے ہاتھ دھونے کے پانچ اسٹیپ کرکے دکھائے۔بچوں نے کھلاڑیوں وصحافیوں سے کھل کر باتیں کیں۔ نارائن تلا اسکول کے مہدی حسین نے بتایاکہ ان کے اسکول میں پندرہ ٹوائلیٹ ہیں۔ اسکول کی جانب سے ان کی صاف صفائی پر بہت دھیان دیاجاتاہے۔ ان کے اسکول میں بجلی کیلئے سولر سسٹم لگا ہوا ہے۔سندربن علاقے میں پانی کی عام پریشانی ہے لیکن اسکول میں پینے کے پانی کامعقول انتظام ہے۔ مہدی بڑے ہوکر ٹیچر بن کر بچوں کوپڑھانا چاہتا ہے جبکہ اس اسکول کا مونیش انجینئر، نورعالم کھلاڑی اور سوبندو ہلدر وکیل۔ بچوں نے بتایاکہ ان کے اسکول میں بیڈ منٹن، کرکٹ، فٹ بال، بالی وال، کراٹے وغیرہ کھیلوں کا انتظام ہے۔ بنودنی گرلس اسکول کی لڑکیوں سے بات کرکے معلوم ہواکہ ان کے اسکول میں صبح کی اسمبلی میں صاف صفائی کے بارے میں بتایاجاتا ہے۔کبھی کبھی اس میں WHOاور یونیسیف کی جانب سے بھی کوئی نہ کوئی آتا رہتا ہے۔ اندرانی سرکار دسویں کی طالبہ نے بتایاکہ کھیلوں کے ساتھ اسکول میں ہمیں باغبانی بھی سکھائی جاتی ہے تاکہ پیڑلگاکرماحول کوصاف رکھا جاسکے۔ سونیا رجک، سومی بھٹا چاریہ، سورانش دتہ بسواس،سریانش تیواری نے سوشل ورک، قانون، انجینئرنگ اور ایم بی اے کی پڑھائی کرنے کی خواہش ظاہرکی۔


یونیسیف مغربی بنگال چیف اسعدالرحمن نے صحافیوں سے بات کرتے ہوئے بتایاکہ صفائی کی اس مہم میں بنگال کے 82ہزار اسکولوں کو شامل کیاگیاہے۔ اس کے تحت صاف صفائی والے شہروں کی عزت افزائی کرنے کا بھی منصوبہ ہے۔ انہوں نے کہا کہ ہاتھ دھونے کی عادت اور کھلے میں رفع حاجت نہ کرنے سے ڈائریا کو روکاجاسکتا ہے۔ انہوں نے بتایاکہ78فیصدگھروں میں بیت الخلاہیں لیکن انہوں استعمال نہیں کیاجاتااورنہ ہی صاف صفائی کاخیال رکھاجاتاہے۔اب سرکار نے ایک ڈپارٹمنٹ بنایا ہے جواسکومونیٹر کرے گا۔انہوں نے کہاکہ بھارت شمالی ایشیاکا ایک واحد ایساملک ہے جہاں بنابہتر سینی ٹیشن کی سہولت والے لوگوں کی تعداد میں اضافہ ہواہے۔ یہ آنکڑا1990 میں 723ملین تھا جو2015میں بڑھ کر774ملین ہوگیا ہے۔

ممبئی کے وانکھیڑے اسٹیڈیم میں ٹیم سوچھ کلینک لانچ کے پہلے مرحلے کی آخری تقریب ہوئی۔اس میں اسکولی بچوں نے ہاتھ دھونے کے اسٹیپ پر

مشتمل یہ نظم پڑھ کرسنائی۔
سب سے پہلے ہوتاہے ہاتھ گیلا
پھرہاتھ پہ ناچے صابن رنگیلا
ہاتھ سے ہوتا پھر ہاتھ کا ساتھ
پھر گھوم کے آگے پیچھے کھیلیں ہاتھ
کھیلو تب انگلیوں میں گھس کر
پھرچلاؤ ناخونوں کا چکر
ہاتھ کرے پھر پانی میں چھم چھم
کیوں کہ صاف ہاتھ میں،ہی ہے دم


یہاں تین رضاکارتنظیمیں بچوں کو ساتھ لے کرآئی تھیں۔ یہ تنظیمیںیوا سنگٹھن، پرتھم اور سی سی ڈی ٹی ساتھ ملکریونیسیف کی مددسے بچوں کے حق اور ان کی حفاظت کیلئے ممبئی میں کام کررہی ہیں۔انہوں نے اسکولی بچوں کے ساتھ والدین کو بھی اس کام میں اپنے ساتھ شامل کیاہے۔سی سی ڈی ٹی کے پروین کمار نے بتایاکہ ممبئی کو چار حصوں میں تقسیم کیاگیا ہے، ایک حصہ کی ذمہ داری ایک تنظیم نے لے لی ہے۔ریلوے اسٹیشن یاریلوے لائن کے آس پاس کے بچوں کی حفاظت کاکام چائلڈلائن والے کرتے ہیں ہمیں بھی کوئی بچہ اگر اس علاقہ میں ملتاہے تو ہم ان کے حوالے کردیتے ہیں۔ پروین کے مطابق یہ تنظیمیں بچوں کی ہر لحاظ سے حفاظت کاخیال رکھتی ہیں مثلاً ان کی بیماریوں سے حفاظت، گندگی سے بچانا، ہیومن ٹریفیکنگ سے محفوظ رکھنا۔ صاف پانی کی فراہمی، کھیل کو د کا انتظام،کمپیوٹر ٹریننگ وغیرہ۔انہوں نے بچوں کیلئے سینٹربنائے ہوئے ہیں جہاں وہ بچوں ووالدین کی میٹنگ لیتے ہیں۔ یہاں ہم نے کئی بچوں سے بات کی ان میں سے سینٹ فرانسس اسکول میں آٹھویں کے طالب علم یش نے بتایاکہ شیواجی نگر بوری والی ویسٹ میں رہتا ہوں۔ ہمارے علاقے کے ٹوائلیٹ میں پانی نہیں آتا تھا۔ ان میں لائٹ، دروازے نہیں تھے۔صفائی کا بھی معقول انتظام نہیں تھا۔ ڈی ڈی بھیا(این جی او والے) نے اس کیلئے ہمارے یہاں ریلی نکالی تومیں ان کے پاس گیا۔انہوں نے بتایاکہ صفائی کے کیا فائدے ہیں۔ باہر سے جو لوگ آتے ہیں وہ ہمارے ملک کی گندگی دیکھ کر واپس چلے جاتے ہیں اس سے ہمارانام بدنام ہوتا ہے۔ جب تک ہم نہیں بدلیں گے دیش نہیں بدلے گا۔


نشانت، سندھیا جوسرکاری اسکول میں پڑھتے ہیں نے بتایاکہ ہمارے یہاں ٹوئلیٹ خراب ہوچکے تھے ان میں صفائی بھی نہیں ہوتی تھی۔ ہم نے بی ایم سی کو اس کیلئے چٹھی لکھی۔ اشونی جوتلک نگر منسی پالٹی کے اسکول میں پڑھتا ہے نے بتایاکہ میں گوونڈی میں رہتا ہوں۔ جہاں بی ایم سی نے ہمارے علاقے کو کوڑا گھر بنادیا ہے۔ اس سے بہت سے لوگ بیمار پڑرہے ہیں۔ میں اسکول میں ٹیچر سے جب ٹوائلیٹ صاف نہ ہونے کی شکایت کرتاتو وہ ہمیں ڈانٹ کر بھگادیتی تھیں۔ ہمارے رہائشی علاقے گوونڈی میں پڑے کوڑے کے ڈھیروں میں دوہفتہ تک آگ لگتی رہی جس کے دھویں اور دھول سے بہت سے لوگ بیمار پڑگئے۔ہم بچوں نے ڈی ڈی بھیاکے ساتھ مل کر ریلی نکالی، ہم اس لڑائی کو آگے بھی جاری رکھیں گے۔

ان چیدہ چیدہ تجربات سے اندازہ لگایاجاسکتا ہے کہ ملک صفائی کے معاملے میں کہاں کھڑا ہے۔ اس مہم کو کھیل کا ساتھ ملا ہے جس سے امید جاگی ہے کہ عوام میں سینی ٹیشن، ہائجین اور واش کو لے کر بیداری آئے گی۔ اسلام میں طہارت کو نصف ایمان بتایا گیا ہے کیوں کہ صفائی اچھی صحت کی ضمانت ہے اور صحت مند انسان ہی اچھے خیالات کو جنم دیتا ہے۔

 

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By Muzaffar Husain Ghazali

Lawyer by training, associate editor at Daily Urdu Net and editor at UNN India