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कन्फेशन बना ब्लैकमेलिंग का हथियार

ईसाई समुदाय में एक बहुत पुरानी परंपरा है- ईश्वर के समक्ष अपने पापों की स्वीकारोक्ति करना। कन्फेशन नाम की इस परंपरा में अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि उससे कोई पाप हुआ है, तो वह चर्च जाकर कन्फेशन यानी अपनी गलती अथवा पाप की स्वीकारोक्ति कर सकता है। कन्फेशन के वक्त वहां एक पादरी मौजूद होता है, जिसके समक्ष लोग अपने पापों की स्वीकारोक्ति करते हैं। माना जाता है कि पादरी के सामने किए गए कन्फेशन के बाद ईश्वर उन्हें उनके पापों से मुक्त कर देता है। ऐसे भी कहा गया है कि अपनी गलती स्वीकार करने से बड़ा प्रायश्चित और कोई दूसरा नहीं होता है। अगर कोई व्यक्ति किसी तरह का गलत काम करता है, तो उसके दिल पर हमेशा ही एक बोझ बना रहता है। कहा जाता है कि अपनी गलतियों को स्वीकार करने के बाद आप उस बोझ से मुक्त हो सकते हैं। संभवतः कन्फेशन की परंपरा यही सोचकर शुरू की गई होगी। जाने-अनजाने लोगों से कुछ न कुछ भूल या गलती हो ही जाती है। लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि जिंदगी भर उस पाप का बोझ अपने सीने पर ढोया जाए।

ईसा मसीह या उनके अनुयायियों ने यही सोचकर पादरी के सामने कन्फेशन करने की परंपरा शुरू की होगी, ताकि कन्फेशन करने वाला व्यक्ति भविष्य में आम जिंदगी जी सकेगा और अनजाने या जाने-जाने अनजाने उससे हुई गलती के बोझ से खुद को मुक्त समझ सकेगा। एक बहुत ही नेक और पवित्र इरादे से शुरू की गई इस परंपरा की गड़बड़ी अब ब्लैकमेलिंग के रूप में सामने आई है। दरअसल, कन्फेशन करते वक्त यह भी माना जाता है कि किसी व्यक्ति का कन्फेशन सुनने वाला पादरी उस व्यक्ति की गलती या पाप को अपने तक ही सीमित रखेगा। कोई तीसरा व्यक्ति उसके बारे में कभी जान नहीं सकेगा। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को उसके कन्फेशन के आधार पर ही ब्लैकमेल किया जाने लगे, तो इससे बड़ा कोई दूसरा अपराध नहीं हो सकता।

ब्लैकमेलिंग अपने आप में एक संगीन अपराध है। लेकिन, अगर कन्फेशन सुनने वाला पादरी ही कन्फेशन करने वाले को ब्लैकमेल करने लगे, तो ऐसा करके वह न केवल ईसाई समाज की एक पुरानी और नेक परंपरा का उल्लंघन करेगा, बल्कि कन्फेशन करने वाले व्यक्ति के विश्वास को भी खंडित करेगा। केरल में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक पादरी ने कन्फेशन करने आई एक महिला के बातों को सुनने के बाद उसी बात को आधार बनाकर उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई, जब उसने ब्लैकमेलिंग करने के क्रम में उस महिला का यौन शोषण करना भी शुरू कर दिया।

केरल के कोट्टायम शहर में कुल पांच पादरियों के खिलाफ एक महिला के पति की शिकायत पर मलंकरा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च में कार्रवाई करते हुए इन सभी पादरियों को ड्यूटी से हटा दिया है। इन पादरियों ने महिलाओं की स्वीकारोक्ति का इस्तेमाल उसे ब्लैकमेल करने के लिए किया था। पीड़ित महिला के पति का आरोप है कि उसने नीरानाम धर्म प्रांत के अध्यक्ष के पास मई के पहले सप्ताह में ही अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन चर्च आरोपियों के खिलाफ एक्शन लेने में देरी करता रहा। पीड़ित महिला के पति का तो यह भी दावा है कि उसके पास दोषी पादरियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। इन आरोपित पादरियों में तीन पादरी नीरानाम धर्म प्रांत के हैं, जबकि एक दिल्ली का तथा एक थुंपामोन धर्म प्रांत का है।

दरअसल, यह महिला शादी के पहले ही अपनी किसी अपराध के कन्फेशन के लिए चर्च गई थी। इस दौरान कन्फेशन सुनने वाले पादरी ने उस महिला की पूरी बात को रिकॉर्ड कर लिया। बाद में इसी रिकॉर्डिंग के आधार पर उसने उस महिला का यौन शोषण किया। महिला की शादी होने के बाद भी वह पादरी उस महिला का यौन शोषण करता रहा। बाद में इस दंपति की एक बेटी हुई और बेटी के बपतिस्मा के समय इस महिला ने बपतिस्मा कराने वाले दूसरे पादरी को अपने यौन उत्पीड़न के बारे में बताया। महिला ने उस पादरी से सलाह भी मांगी कि उसका यौन उत्पीड़न करने वाले पादरी के खिलाफ क्या और कैसे कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन, आरोप है कि इस दूसरे पादरी ने उसे कोई सलाह देने के स्थान पर अपने तीन अन्य साथी पादरियों को इस बात की जानकारी दे दी। जिसके आधार पर इन सभी पादरियों ने भी उस महिला को ब्लैकमेल कर उसका यौन उत्पीड़न किया।

जब बात हद से गुजर गई इस महिला ने अपने पति को पूरी जानकारी दी और तब जाकर यह मामला प्रकाश में आया। महिला के पति ने हिम्मत दिखाते हुए मामले की शिकायत मलंकरा ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च में की, जिसके बाद इन पांचों पादरियों को ड्यूटी से हटाया गया। हालांकि, चर्च अभी इस मामले की आंतरिक जांच कर रहा है और आंतरिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही पादरियों के खिलाफ कोई एक्शन लेने की बात कह रहा है। चर्च के पादरियों पर यौन उत्पीड़न की शिकायत की यह कोई पहली घटना नहीं है। केरल से ही पहले भी इस तरह की घटनाओं की जानकारी आती रही है। कई बार कई ननों ने भी पादरियों द्वारा यौन उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाया है। छत्तीसगढ़, झारखंड और पूर्वोत्तर भारत से भी इस तरह की शिकायतें आती रही हैं। यह अलग की बात है कि अल्पसंख्यकों से जुड़ा मामला होने की वजह से अभी तक ऐसे मामलों को दबा दिया जाता रहा है।

ऐसे मामले कभी मीडिया की सुर्खी नहीं बनते, लेकिन सच्चाई यही है कि चर्च में सफेद कपड़े से सज्जित पादरियों के बीच कई गलत लोग भी घुसे हुए हैं, जिनका उद्देश्य समाज की सेवा करना न होकर अपनी जिंदगी खुशहाल और आरामदेह बनाना हो गया है। ऐसे ही लोगों के बारे में अभी तक शिकायतें आती रही हैं। इनमें से कई लोग प्रभावशाली भी होते हैं, जिसकी वजह से ऐसे मामलों को दबा दिया जाता है। चर्च में कन्फेशन की परंपरा लोगों को अपराध बोध की भावना से मुक्त कराने के लिए शुरू की गयी थी, ना कि उन्हें ब्लैकमेल का शिकार बनाने के लिए। लेकिन, कोट्टायम से जो खबर आई है, उससे लगने लगा है की कन्फेशन अब गलत मंशा वाले कुछ पादरियों के लिए ब्लैकमेलिंग और कमाई का जरिया बन गया है।

केंद्र और राज्य की सरकारों को इस मामले की पूरी गहराई से जांच करानी चाहिए, ताकि चर्च की आड़ में चलने वाले यौनाचार, यौन उत्पीड़न या यौन शोषण जैसे घृणित कामों का खुलासा हो सके। साथ ही कन्फेशन की आड़ में भविष्य में किसी महिला या किसी पुरुष को ब्लैकमेलिंग का शिकार न बनाया जा सके। चर्च आध्यात्मिक कार्यों के संचालन का ही स्थान होना चाहिए, किसी आपराधिक गतिविधि का अड्डा नहीं बनना चाहिए।

Sirf News Network

By Sirf News Network

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