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असम से ब्रह्मपुत्र के ज़रिए बांग्लादेश — जानवरों की तस्करी पकड़ी गई

दक्षिण शालमारा — तस्कर पशुओं को नाव पर लादकर सोमवार को अंधेरा होने पर ब्रह्मपुत्र नद के ज़रिए बांग्लादेश भेजने की फिराक में थे। इतने में निचले असम के दक्षिण शालमारा ज़िले से बांग्लादेश को पशुओं की तस्करी की भनक असम पुलिस को लग गई।

सूचना मिलते ही पुलिस ने सीमा सुरक्षा बल के साथ मिलकर अभियान चलाते हुए 4 पशुओं को तस्करों के चंगुल से बचाया। पर सुरक्षाबलों को देख तस्कर मौके से फ़रार होने में सफल हो गए। अंधेरा होने की वजह से तस्कर सुरक्षा बलों को चकमा देने में सफल रहे।

भारत और बांग्लादेश की जल सीमा पूरी तरह से खुली हुई है। तस्कर इसका फ़ायदा उठाते रहते हैं। सीमा सुरक्षा बल की पेट्रोलिंग ब्रह्मपुत्र नदी में लगातार जारी रहती है बावजूद इसके तस्करी के गोरखधंधे को पूरी तरह से रोका नहीं जा सका है।

पश्चिम बंगाल से भी बांग्लादेश को गर्भवती गायों, बीमार और छोटे जानवरों की अवैध सप्लाई होती है। बांग्लादेश का मांस और चमड़ा व्यापार का एक बड़ा हिस्सा ऐसी तस्करी पर निर्भरशील है।

भारत से तस्करी के कारण गोमांस सस्ता होता है; इसकी सबसे अधिक मांग बांग्लादेश में है। बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (बीएसएफ़) के अनुसार भारत से हर साल क़रीब 3,50,000 गायों को चोरी छिपे बांग्लादेश सीमा पार करवाकर बेचा जाता है। तस्करी का सालाना कारोबार 15,000 करोड़ रुपए से ज़्यादा का है। 2014-15 के दौरान बीएसएफ़ ने 34 गाय तस्करों को मुठभेड़ में मार गिराया।

बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाक़ों से तस्करी करने के लिए ले जाईं जा रहीं 200 से 250 गायों को बीएसएफ़ रोज़ाना बरामद करती है। असम गाय तस्करी का केंद्र है। असम-बांग्लादेश के बीच लगभग 263 कि०मी० लंबी सीमारेखा है जहाँ से से गायों को बांग्लादेश पहुंचाने का ग़ैर-क़ानूनी काम चलता है। भारत-बांग्लादेश सीमा पर गायों की तस्करी को रोकने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बारे में अपनी सिफ़ारिश केंद्र सरकार को सौंपी है जिस पर कई सख़्त क़दम उठाए जा रहे हैं।

कुछ महीने पहले गोरूमारा जंगल में गेंडे के दो शव बरामद हुए थे। एशियाई देशों में गेंडे के सींग और अन्य पशु अंगों की भारी मांग है। 1993-2013 के दौरान मारे गए गेंडों की संख्या 100 थी।

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By Sirf News Network

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